देवघर | 3 सितंबर 2026
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), देवघर के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा (CFM) विभाग द्वारा संचालित SARPA (Snakebite Awareness, Response, Prevention and Action) रिसर्च प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो दिवसीय ‘सर्प-मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026’ का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम 29 सितंबर को एम्स देवघर परिसर तथा 30 सितंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), मोहनपुर में संपन्न हुआ। ‘सर्पदंश से होने वाली मृत्यु को शून्य करने की पहल’ (Zero Snakebite Death Initiative) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में देवघर एवं मोहनपुर प्रखंड की विभिन्न पंचायतों से चयनित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के उपरांत प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव, जागरूकता, सुरक्षित प्राथमिक सहायता तथा समय पर अस्पताल पहुंचाने में सहयोग के लिए ‘सर्प-मित्र’ स्वयंसेवक के रूप में चुना गया।

सर्पमित्र समुदाय के स्व-प्रेरित, प्रशिक्षित “ज्ञान सहयोगी (Knowledge Partners)” हैं, जो अगले 4 वर्षों तक समुदाय स्तर पर सर्पदंश की रोकथाम, जागरूकता एवं सही वैज्ञानिक जानकारी के प्रसार में सहयोग करेंगे।प्रत्येक पंचायत से लगभग 5 से 6 सर्प-मित्रों का चयन किया गया, जिसमें झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिला कार्यकर्ताओं, कृषि मित्रों के साथ-साथ संबंधित पंचायत के मुखिया द्वारा सुझाए गए सक्रिय व कर्मठ ग्रामीणों को शामिल किया गया।
सर्पमित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपायुक्त, देवघर के नामित प्रतिनिधि ने मुख्य अतिथि तथा सिविल सर्जन, देवघर ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। प्रशिक्षण में व्यावहारिक कौशल पर विशेष जोर देते हुए वरिष्ठ Zoo Biologist विवेकानंद कुमार एवं वन्यजीव संरक्षक रमेश कुमार महतो ने विषैले एवं गैर-विषैले सांपों की पहचान, सुरक्षित दूरी, सर्प संरक्षण तथा Live Rescue का प्रदर्शन किया और सर्पदंश से जुड़ी भ्रांतियों एवं अंधविश्वासों का वैज्ञानिक समाधान बताया। कार्यक्रम में वन विभाग से राजीव कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग से राजीव रंजन, जिला कृषि विभाग, सुशील कुमार दास (DPM, JSLPS) तथा डॉ. मनीष शेखर (जिला नोडल पदाधिकारी, सर्पदंश एवं IDSP) ने क्रमशः सर्प संरक्षण एवं जैव विविधता, आपातकालीन समन्वय, किसानों की सुरक्षा, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामुदायिक जागरूकता तथा सर्पदंश की त्वरित सूचना, ASV उपलब्धता एवं निगरानी व्यवस्था पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
यह संपूर्ण कार्यक्रम एम्स देवघर के मुख्य संरक्षक (Chief Patron), कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (ED & CEO) प्रो. (डॉ.) नितिन एम. गंगने तथा डीन एकेडमिक्स प्रो. हरमिंदर सिंह के कुशल मार्गदर्शन एवं संरक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का वैज्ञानिक संयोजन एवं नेतृत्व प्रधान अन्वेषक (PI) डॉ. सुनील कुमार पाणिग्रही (सह-प्राध्यापक, CFM विभाग) द्वारा किया गया। इस अवसर पर सह-संरक्षक प्रो. (डॉ.) जी. जाह्नवी (अधिष्ठाता-छात्र कल्याण एवं विभागाध्यक्ष, CFM) तथा सह-अन्वेषक (Co-PIs) डॉ. अभिजीत विनोदराव बोराटने, डॉ. ऋचा, डॉ. मनीष शेखर, डॉ. सुदीप भट्टाचार्य, डॉ. दिब्यांशु, डॉ. विनयगमूर्ति वी., डॉ. अरशद अय्यूब, डॉ. आभा कुमारी, डॉ. राजेश कुमार एवं डॉ. निशात अहमद शेख सक्रिय रहे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन, पंजीकरण, आंकड़ों के संकलन, तकनीकी व्यवस्था एवं मूल्यांकन में (SARPA) टीम के डॉ. अतानु चक्रवर्ती (वैज्ञानिक-II), डॉ. गोपाल कृष्णा, बीरेंद्र कुमार, युवराज सिन्हा एवं नितिन मांझी ने समर्पित भूमिका निभाई। दोनों दिनों के सफल समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह पहल ग्रामीण स्तर पर सर्पदंश जागरूकता, त्वरित सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों का एक सशक्त नेटवर्क स्थापित करने में मददगार साबित होगा।
