अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिक्स (BRICS) को एक मजबूत आधार प्रदान करने के डिक्लेरेशन के साथ ब्राजील के रिओ डी जेनेरो में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन सम्पन्न हो गया।6 और 7 जुलाई को आयोजित इस सम्मेलन में ब्राजील, भारत ,चीन,रूस और साउथ अफ्रीका ने भाग लिया। ब्रिक्स सम्मेलन के मूल में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि वर्तमान की अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जिनमें संयुक्त राष्ट्र संघ की सिक्योरिटी काउंसिल से लेकर IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएं शामिल हैं, समय के साथ अब इनकी उपयोगिता कमजोर पड़ने लगी हैं। ये संस्थाएं विश्व के पटल पर तेजी से उभर रही अर्थव्यवस्थाओं को उतना तरजीह नहीं दे रही हैं जितना महत्व उन्हें मिलना चाहिए। ब्रिक्स नेताओं ने वर्तमान की वास्तविकता के आधार पर इनमें सुधार लाने की जरूरत पर सहमति व्यक्त की। ब्रिक्स में नए सदस्य के रूप में ईरान, इजिप्ट, इथियोपिया और यूएई के शामिल होने से इसकी पहचान अब विश्व के मजबूत आर्थिक संगठन के रूप की जाने लगी है।
ब्रिक्स 2025 के डिक्लेरेशन में पश्चिम पर निर्भरता कम करने पर भी सहमति व्यक्त की गई है। ब्रिक्स देशों ने पहलगांव आतंकवादी हमले की कड़ी निन्दा की और इस तरह की आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सामूहिक पहल करने पर भी सहमति व्यक्त की गई।
2026 में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स को एक नए आयाम देने की सहमति के साथ सम्मेलन संपन्न हुआ।भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स को पश्चिम और नए उभर रहे आर्थिक प्रगति पर अग्रसर देशों के बीच एक पूल की तरह इसकी भूमिका तय करने की चुनौती होगी।खास कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ब्रिक्स के खिलाफ बयानबाजी और धमकियों के साए तले इस संगठन की वैश्विक स्तर पर भूमिका तय करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
