जल हमारे जैवमंडल का सबसे महत्वपूर्ण घटक है.प्रथम तों यह हर प्रकार के जीवन चक्र का आधार है और द्वितीय यह जैवमंडल के पोषक तत्वों की चक्रीया व्यवस्था को सम्पादित करता है.यह जल ही है जो पृथ्वी पर ठोस,तरल और वाष्प तीनों रूपों में अपने चक्र को सम्पादित करके जैवमंडल को सक्रियता प्रदान करता है.इसका महत्व तब और भी बढ़ जाता है जब हम इसका उपयोग ऊर्जा,उत्पादन,उद्योग,परिवहन,सिंचाई और घरेलू कार्यों के लिए करते हैं.यहाँ यह उल्लेख करना जरुरी है कि पृथ्वी के कुल जल क्षमता का केवल 1% ही जैविक समुदाय के लिए भूमिगत जल,नदियों और झीलों के रूप में उपयोगी है.निरंतर बढ़ती जनसंख्या के कारण इस उपयोगी जल की मांग भी उतरोत्तर बढ़ती गई और दूसरी तरफ हमने ऐसे तत्व इसमें मिला दिए जो पूरे जैविक समुदाय के लिए हानिकारक है.वैज्ञानिक सलाहकार समिति ने जल प्रदूषण को इस प्रकार परिभाषित किया है -“ जल प्रदूषण जल के भौतिक,रासायनिक एवं तत्विक विशेषताओं में वह परिवर्तन है जो मानव एवं जलीय प्राणियों पर हानिकारक प्रभाव डालता है.”

जीवन में बहुत सी चीजें जरुरी है लेकिन जल सबसे ज्यादा जरुरी है.अन्न के बिना दो चार दिनों तक जिन्दा रहना संभव भी है लेकिन जल के बिना एक दिन भी गुजारना कठिन हो जाता है.ऐसे में सरकार और समाज के स्तर से जल संरक्षण के प्रति गंभीर प्रयास की सख्त जरुरत है.लेकिन इसका सबसे दुःखद पहलु यह है कि हम खुद इसके प्रति गंभीर नहीं हैं.
रजत मुखर्जी,
पर्यावरणविद
