देवघर जसीडीह मुख्य मार्ग पर रोहिणी मोड़ के समीप स्थित दामोदर ग्राम इस्कॉन मंदिर के प्रस्तावित स्थल पर बड़े ही धूमधाम के साथ नेत्रत्सव मनाया गया।भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पूर्व यह एक बड़ा अनुष्ठान होता है। लगातार 14 दिनों तक बीमार रहने के बाद 15वें दिन भगवान जगन्नाथ की जब तबीयत ठीक होती है तो भगवान जगन्नाथ,भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा को नया नेत्र प्रदान की जाने की परंपरा है । इसके बाद चंदन एवं सिंदूर से भगवान का श्रृंगार किया जाता है।अब भगवान अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।देवघर इस्कॉन मंदिर में इस उत्सव को बड़े ही धूमधाम एवं पारंपरिक तरीके से आज मनाया जा रहा है बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने कतार वध होकर अपनी अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
देवघर इस्कॉन के प्रमुख श्री श्रीनिवास गोपाल दास जी ने बताया कि पारंपरिक रुप से रथयात्रा कल शाम 3:30 बजे शिवलोक परिसर देवघर से निकाली जाएगी जो यात्रा विभिन्न मार्गो से होते हुए प्रस्तावित इस्कॉन मंदिर जसीडीह के रोहिणी मोड़ पर समाप्त होगी। मंदिर में भगवान की महाआरती के बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा।इस बार भगवान नई तकनीक से बनाई गई रथ जिसमें हाइड्रोलिक गुंबद है जो लगभग 40 फीट ऊंचा तक उठाया जा सकता है जिसे कम भी किया जा सकता है।रथ को लकडी पर मनमोहक मक्काशी कर बनाया गया है।इसी पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ नगरवासियों को दर्शन देने हेतु नगर भ्रमण को निकलेंगे।यह यात्रा शहर के राय कंपनी चौक, टावर चौक, vip चौक, सत्संग चौक, बेला बागान, डेरवा नदी, चांदपुर होते हुए जसीडीह मुख्य मार्ग पर रोहिणी मोड़ पर आकर समाप्त होगी।इस भव्य रथयात्रा महोत्सव में अनेकों गणमान्य अतिथि एवं अन्य श्रद्धालु रथ को खीचेंगे।श्रद्धालु रथ के आगे झाड़ू लगाकर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा समर्पित करेंगे।
मंदिर प्रबंधन द्वारा लोगों से इस रथयात्रा महोत्सव में पहुंचे का निवेदन किया गया है।
