April 17, 2026

Viewers Corner

विश्व भाषा दिवस 21 फरवरी पर विशेष

भाषा आंदोलन का इतिहास

21 फ़रवरी 1952 को तत्कालीन पाकिस्तान में बांग्ला को राज्य भाषाओं में शामिल करने की मांग को लेकर छात्रों और आम जनता ने सड़कों पर आंदोलन किया।पुलिस की गोलीबारी में रफ़ीक, जब्बार, शफिउर, सलाम और बरकत सहित कई लोग शहीद हुए।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: 1999 में यूनेस्को ने 21 फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मान्यता दी,जो भाषा शहीदों के बलिदान के प्रति वैश्विक श्रद्धांजलि है।
बांग्ला भाषा प्रचलन अधिनियम: सभी स्तरों पर बांग्ला भाषा के उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश सरकार ने 1987 में बांग्ला भाषा प्रचलन अधिनियम जारी किया।
भाषा की उत्पत्ति और विकास: बांग्ला भाषा की उत्पत्ति मागधी प्राकृत और अपभ्रंश से हुई है।इस भाषा का प्राचीनतम प्रमाण ‘चर्यापद’ है।
विश्व में स्थान: वर्तमान में लगभग 28 करोड़ 50 लाख लोग बांग्ला को मातृभाषा के रूप में बोलते हैं, जो मातृभाषा बोलने वालों की संख्या के आधार पर इसे विश्व की छठी सबसे बड़ी भाषा बनाती है।
ध्रुपद (शास्त्रीय) भाषा का दर्जा: 2024 में भारत सरकार ने बांग्ला को ‘ध्रुपद (Classical) भाषा’ का दर्जा दिया, जो इसकी समृद्ध इतिहास और परंपरा को दर्शाता है।

-रजत मुखर्जी


विलुप्ति के कगार पर क्यों पहुँचने लगी है गोरैया?

पर्यावरण असंतुलन ने सिर्फ इंसान ही नहीं पशु पक्षियों और अन्य जीव जंतुओं पर भी अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है.खास कर छोटी पक्षियों का जीवन चक्र इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.यही कारण है कि कल तक घर आँगन की शोभा बढ़ाने वाली गौरया अब धीरे धीरे विलुप्त होने के कगार पर पहुँच गई है.
इस मुद्दे को करीब से जानने की कोशिश की है प्रसिद्ध पर्यावरणविद रजत मुख़र्जी ने-

विलुप्ति के कगार पर क्यों पहुँचने लगी है गोरैया?
कारणों की पड़ताल में जो बातें सामने आई हैं उनमें से मुख्य कारण निम्न हैं-

  1. मोबाइल फोन से एक प्रकार का विकिरण निकलता है, जो अल्ट्रावायलेट रेंज से कुछ ज्यादा ही शक्तिशाली होता है। जिसके प्रभाव से गोरैया या अन्य छोटी चिड़ियों की हृदय गति को प्रभावित होती हैं।
  2. सामान्यत सभी चिड़िया गर्म खून (hot blodded) वाले होते हैं, जिनका हृदय गति 120 से 125 पल्स प्रति मिनट की होती है।लेकिन, इस हानिकारक विकिरण के कारण उनके हृदय गति में कमी आ जाती है। वस्तुतः वे अधिक दिन तक जिंदा नहीं रह पाते।
  3. कुछ विकिरण अनाज के दानों को भी बहुत प्रभावित करते हैं।जिसके फलस्वरूप उनके जीवन शैली में परिवर्तन आ जाती है। छोटी चिड़िया अधिकतर जंगलों में रहने वाले होते हैं लेकिन गोरैया (Sparrow) के ऊपर इसका असर अधिक होता है। फलस्वरूप इनके अंडों से प्रजनन दर कम हो जाते हैं।
  4. प्रजनन अनुपात में असंतुलन होने की वजह से गोरैयों में मेल कम एवं फीमेल पक्षी अधिक पैदा हो रहे हैं।
    यही वजह है कि आजकल गोरैया पक्षी कम दृष्टिगोचर होते हैं।
    —- रजत मुखर्जी।