भारतीय रेलवे में समपार फाटक (एलसी) ऐसे इंटरसेक्शन होते हैं जहाँ रेलवे ट्रैक सड़कों या पाथवे को समान स्तर पर पार करते हैं।इन्हें ट्रेनों, वाहनों और पैदल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। समपार फाटकों (लेवल क्रॉसिंग गेटों) को मानवयुक्त गेटों में वर्गीकृत किया गया है, जिनका संचालन रेलवे कर्मचारियों द्वारा किया जाता है और ये या तो इंटरलॉक्ड (सिगनलिंग सिस्टम से जुड़े होते हैं) या नॉन-इंटरलॉक्ड (मैन्युअल रूप से संचालित) होते हैं,इन्हें मानवरहित गेटों में वर्गीकृत किया गया है, जो सावधानी बोर्ड या साइनेज पर निर्भर होते हैं।ये गेट रेलवे क्रॉसिंग पर दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) एक ऐसा पुल होता है,जिसका निर्माण सड़कों को रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरने की अनुमति देने के लिए उन्हें बिना ग्रेड लेवल पर काटे किया जाता है।रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) समपार फाटकों की आवश्यकता को समाप्त करते हैं, निर्बाध यातायात सुनिश्चित करते हैं और यात्री सुरक्षा को बढ़ाते हैं। ये संरचनाएँ उच्च रेल और वाहनों की भीड़ वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये समपार फाटकों पर प्रतीक्षा के कारण होने वाली देरी को कम करती हैं।रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) रेल और सड़क नेटवर्क की दक्षता में सुधार के लिए भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
सुरक्षा ,दक्षता और सुविधा में सुधार के लिए समपार फाटकों को रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) में बदलना महत्वपूर्ण है। समपार फाटकों के बार-बार बंद होने के कारण अक्सर ट्रैफिक जाम होने की स्थिति पैदा होती है और यदि सड़क उपयोगकर्ता चेतावनियों की अनदेखी करते हैं तो दुर्घटनाएँ भी हो सकती हैं।रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) ग्रेड-सेपरेटेड क्रॉसिंग प्रदान करके, निर्बाध सड़क यातायात सुनिश्चित करते हैं और टकराव की संभावना को कम करके ऐसे जोखिमों को समाप्त करते हैं। इसके अलावा रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) लेवल क्रॉसिंग के पास गति प्रतिबंधों की आवश्यकता को समाप्त करके ट्रेनों की समयबद्धता को बढ़ाते हैं, जिससे ट्रेन का परिचालन अधिक सुचारू और सुरक्षित हो जाता है।
चालू वर्ष में दो समपार फाटकों अर्थात् 1/ए/ई (बाराचक और हासीमारा के बीच) और 6/एसपीएल/टी (अंडाल और तोपसी के बीच) को पहले ही रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) प्रदान करके बंद कर दिया गया है।इस वर्ष तीन अन्य समपार फाटकों अर्थात् 21 (चिनपाई और सिउड़ी के बीच), 22 (अंडाल और सैंथिया के बीच), और 27 (शंकरपुर और जसीडीह के बीच) को रोड ओवर ब्रिज बनाकर बंद करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल राज्य सरकार से पहले ही प्राप्त आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के साथ की जा रही है।
यह पहल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के माध्यम से संरक्षा और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे की पहल सराहनीय कही जा सकती है.समपार फाटकों के स्थान पर रोड ओवर ब्रिज बनाने से ट्रैफिक देरी में उल्लेखनीय कमी आएगी, ट्रेनों की आवाजाही में सुधार होगा और यात्रियों तथा सड़क उपयोगकर्ताओं की समग्र संरक्षा भी सुनिश्चित हो पायेगी।
