सर्पदंश से हो रही इंसानी मौतों पर गंभीरता दिखाते हुए आई सी एम आर (Indian Council of Medical Research) ने इससे बचाव के लिए SARPA (Snakebite Awareness, Response Prevention Action) नाम के एक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है.झारखण्ड सहित सात राज्यों में प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जा रहा है.झारखण्ड में देवघर एम्स को इसका जिम्मा सौंपा गया है.

सर्पदंश से प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में होने वाली इंसानी मौतों को गंभीरता से लेते हुए ICMR द्वारा झारखण्ड सहित देश के सात राज्यों-महाराष्ट्र,ओड़िसा,पश्चिम बंगाल,असम,हिमाचल प्रदेश और केरलम को इस प्रजेक्ट से जोड़ा गया है. झारखण्ड में इस प्रोजेक्ट का जिम्मा देवघर एम्स को दिया गया है.इसके तहत देवघर के दो प्रखंड देवघर और मोहनपुर को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किया गया है.अगले चार वर्षो तक यहाँ सर्पदंश और इससे बचाव से जुडी जानकारियां और लोगों को इस सम्बन्ध में जागरूक करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया जाना है.इस कार्य में चिकित्सकों के अलावा वन विभाग,शिक्षा विभाग नेशनल डिजास्टर फोर्स,डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी सहित देवघर उपायुक्त कार्यालय को भी इस अभियान में शामिल किया गया है.NHM के लोगों का भी प्रोजेक्ट में सहयोग लिया जाएगा.देवघर एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर,कम्युनिटी और फैमिली मेडिसिन विभाग और SARPA प्रोजेक्ट के Investigator डॉ सुनील कुमार पनिग्राही ने एम्स देवघर में आयोजित हितधारकों की मीटिंग में यह जानकारी दी.
देवघर एम्स के निदेशक डॉ नितिन गंगने ने कहा कि प्रोजेक्ट के सफल संचालन के लिए सभी हितधारकों के बीच समन्नवय स्थापित करते हुए सर्पदंश जैसी समस्या से निजात पाना एक बड़ी चुनौती है,देवघर एम्स के सहयोग से इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट द्वारा अगर लोगों को सर्पदंश से छुटकारा दिलाने में सफलता मिलती है तो यह झारखण्ड जैसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी.
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले सर्पदंश को एक नोटिफायड डिजीज का दर्जा दिया गया है.इसके तहत कहीं भी सर्पदंश का केस होने से इसे नोटिफायड करना अनिवार्य कर दिया गया है.प्रत्येक वर्ष सर्पदंश से बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है खासकर झारखण्ड जैसे राज्य जहाँ की बड़ी आवादी को अपने जीवन यापन के लिए जंगलों और पहाड़ो पर
निर्भर रहना पड़ता है,इस दिशा में इस तरह की सार्थक पहल सही दिशा में उठाया गया बड़ा कदम कहा जा सकता है.
