पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल ने 05 अप्रैल, 2026 को ट्रैक के जरूरी अनुरक्षण और नवीनीकरण कार्यों को पूरा करने के लिए चिन्हित सेक्शनों में एक 'मेगा ब्लॉक' का आयोजन किया। इस मेगा ब्लॉक को इंजीनियरिंग विभाग द्वारा पूरी योजना और तालमेल के साथ क्रियान्वित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य संरक्षा को बढ़ाना और ट्रेनों के परिचालन को अधिक सुचारू बनाना था।

इस मेगा ब्लॉक के दौरान, तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव के बावजूद ट्रैक की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए 10 किलोमीटर के दायरे में 'ट्रैक डी-स्ट्रेसिंग' का कार्य किया गया। ट्रैक की निरंतरता को बेहतर बनाने के लिए 3000 मीटर लंबे ट्रैक पर ट्रैक फिटिंग्स का नवीनीकरण किया गया और 28 रेल जोड़ों की वेल्डिंग की गई। इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए 760 मीटर रेल पटरियों को बदला गया और 138 मीटर लंबे पुल-रेल का नवीनीकरण किया गया।
ट्रैक की मजबूती और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 650 मीटर के दायरे में ट्रैक की 'डीप स्क्रीनिंग' की गई। ट्रैक की ज्यामिति और संरेखण (alignment) को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 7.1 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर 'टैम्पिंग' का कार्य किया गया और एक 'टर्नआउट' (रेल-पथ परिवर्तन बिंदु) का रखरखाव किया गया। रेल पटरियों की घिसावट को कम करने और यात्रा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए 16 किलोमीटर के दायरे में 'रेल ग्राइंडिंग' का कार्य पूरा किया गया।
इसके अलावा, जलजमाव को रोकने के लिए 276 मीटर के दायरे में मशीनों की सहायता से जल निकासी नालियों की सफाई की गई। ट्रैक के विभिन्न घटकों की स्थायित्व और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के लिए 10 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर फिटिंग्स में ग्रीसिंग की गई और 8.4 किलोमीटर के दायरे में 'लाइनर संपर्क क्षेत्र' पर पेंटिंग का कार्य किया गया।
ये सभी कार्य ट्रैक में आने वाली कमियों को रोकने, रेल पटरियों के टूटने के जोखिम को कम करने और ट्रैक की उचित ज्यामिति को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होते हैं। आसनसोल मंडल से होकर यात्रा करने वाले यात्रियों को अब अधिक सुचारू यात्रा, बेहतर विश्वसनीयता और बढ़ी हुई संरक्षा का अनुभव प्राप्त होगा; साथ ही, ट्रेनों की समय-पालन क्षमता में भी सुधार देखने को मिलेगा।
रेलवे द्वारा यह जानकारी दी गई है.
