2020 के बाद इस वर्ष भारत और चीन के बीच हुए समझौते के तहत फिर से कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू हुई लेकिन नेपाल की घटना के कारण हज़ारों की संख्या में तीर्थंयात्री तिब्बत के छोटे से शहर दारचेन में फंस गए हैं.
दोनों देशों के बीच समझौता के तहत 750 तीर्थंयात्रियों को दो अधिकृत रूट-सिक्किम और उत्तराखंड के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने का अवसर मिला था.लेकिन कुछ यात्री नेपाल के रास्ते निजी ट्रेवल एजेंसीज के मध्यम से दारचेन पहुँच गए थे.तीन दिन पहले जब उनकी परिक्रमा पूरी हुई तब तक नेपाल में स्थिति बेकाबू हो चुकी थी और बॉर्डर सील कर दी गई थी.
लगभग 6000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस शहर में ठहरने की सिमित संसाधन और ऑक्सीजन सहित मेडिकल सुविधाओं के अभाव में तक़रीबन 2000 तीर्थंयात्री अपने भविष्य को लेकर परेशानी में पड़ गए हैं.अब उनकी आखरी उम्मीद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय पर टिकी है.इनके द्वारा विदेश मंत्रालय से संपर्क कर मदद की गुहार लगाई जा रही है.खास कर निजी एजेंसीज के जरिये नेपाल के रास्ते दारचेन पहुंचे तीर्थंयात्रियों को नेपाल के रास्ते ही वापस आना है लेकिन नेपाल की आतंरिक स्थिति बदतर होने के कारण इनकी वापसी में परेशानी आ रही है.कुछ बुजुर्ग तीर्थंयात्रियों के लिए तो स्थिति और भी नाजुक बताई जा रही है.
