कभी हमारे घर-आँगन और खेतोँ में सहज़ दिखाई देने वाली छोटी पक्षी गौरया अब विलुप्ति के कगार पर पहुँच चुकी है.देखने में छोटी और साधारण सी दिखने वाली यह पक्षी एक घरेलू पक्षी होने के साथ ही हमारे पर्यावरणीय संतुलन की एक महत्वपूर्ण कड़ी रही है.लेकिन दुर्भाग्यवश अंधाधुंध शहरीकरण और बेपरवाह रहन सहन की हमारी आदतों ने इस छोटी सी महत्वपूर्ण पक्षी को आज विलुप्ति के कगार पर पहुंचा दिया है.
विश्व भर में गौरया की 26 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें 5 प्रकार की यह पक्षी भारत में पाई जाती है.Nature Forever Society के अध्यक्ष मो.दिलावर जी के विशेष प्रयासों से पहली बार वर्ष 2010 में विश्व गौरया दिवस मनाया गया था,तब से पूरे विश्व में प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को गौरया के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व गौरया दिवस मनाया जाता है.
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई,प्रदूषित वातावरण और खेतोँ में फसलों पर हानिकारक कीटनाशक के प्रयोग के कारण गौरया का परिवार नष्ट होने लगा है.इन पक्षियों की प्रजाति विलुप्त होने के कारण प्रकृति की सुंदरता भी प्रभावित हो रही है.ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और संतुलन के लिए और अपने घर-आँगन में फिर से इनकी चह-चहाहट लौटाने के लिए आज के दिन इस खूबसूरत छोटी पक्षी के संरक्षण का शपथ लेने और उस पर गंभीरता पूर्वक अमल करने की सख्त जरुरत है.
रजत मुख़र्जी
पर्यावरणविद

