2027 जनगणना पर 14,619 करोड़ की राशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया है.देश का यह पहला ‘डिजिटल सेंसस’ होगा जिसमें जाति जनगणना को भी शामिल किया गया है.रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया ने सरकार के सामने राशि की मांग रखी है.अगस्त के शुरू में ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रजिस्ट्रार जनरल ऑफ़ इंडिया द्वारा इस सम्बन्ध में Expenditure Finance Committee को पत्र भेज कर प्रस्ताव रखा गया था.EFC केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत वह संस्था है जो सरकार की योजनाओं और प्रोजेक्ट की समीक्षा करती है.EFC द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कैबिनेट के समक्ष इसकी स्वीकृति का प्रस्ताव रखा जाएगा.
खर्च का यह अनुमान जनगणना के दोनों फेज के लिए लगाया गया है-पहला फेज अप्रैल से सितम्बर 2026 तक चलाया जाएगा जिसके अंतर्गत मकानों और रिहायसी संरचनाओं की गणना की जाएगी जबकि दूसरा फेज वास्तविक जनगणना का होगा जो फ़रवरी 2027 में शुरू होगा,इसमें लद्दाख,जम्मू और कश्मीर,हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को शामिल नहीं किया गया है,यहाँ यह जनगणना सितम्बर 2026 में ही की जाएगी.
जनगणना कार्य में तक़रीबन 35 लाख जनगणकों और पर्यंवेक्षकों को लगाया जाएगा जो 2011 की जनगणना में लगाए गए कर्मियों से 30% अधिक है.केंद्र सरकार ने इसी वर्ष 16 जून को जनगणना 2027 की घोषणा की थी.यह पहली वार है जब प्रत्येक दस वर्षो में की जाने वाली जनगणना 6 वर्ष बिलम्ब से हो रही है.2021 की जनगणना कोविड के कारण स्थगित कर दी गई थी.
दस वर्षीय जनगणना सन 1872 से लगातार बिना रुकावट के होती रही है.इस कड़ी में 2027 जनगणना 16वीँ जनगणना होगी और आजादी के बाद की 8वीँ जनगणना.
