गुरुवार को बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन(SIR)पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया लेकिन न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची के बेंच ने चुनाव आयोग को इसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को भी आवश्यक दस्तावेज की सूची में शामिल करने की बात कही।हालांकि कोर्ट ने इसे मानना या ख़ारिज करना चुनाव आयोग के विवेक पर छोड़ दिया लेकिन यह भी कहा कि अगर इसे ख़ारिज किया जाता है तो उसका उचित कारण भी बताना चाहिए।इससे पहले चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने जिरह करते हुए चुनाव आयोग द्वारा तय 11 तरह के प्रमाण को काफी बताया।कोर्ट ने ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने से पहले 28 जुलाई को उचित बेंच में सुनवाई के लिए तारीख तय कर दिया।याचिकाकर्ता की और से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, ए एम सिंघवी, गोपाल शंकरनारायनन और शादान फरासत ने अपनी बात रखी।दोनों तरफ का जिरह सुनने बाद कोर्ट ने कहा कि हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि प्रथम दृष्टया इस पूरे मामले में तीन प्रश्न शामिल हैं- एक तो चुनाव आयोग को कानूनन यह अधिकार है या नहीं, दूसरा इस पूरी कवायद की प्रक्रिया और तौर तरीके को लेकर आपत्ती है और तीसरा इस प्रक्रिया के लिए अब जो समय बचा रह गया है क्योंकि बिहार में चुनाव नवंबर माह में संभावित है।कोर्ट ने कहा कि हमारे विचार से इस मामले की सुनवाई की जरूरत है इसलिए इसके लिए हमने उचित बेंच में सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय कर दी है।इस बीच चुनाव आयोग को एक सप्ताह के अंदर अर्थात 21 जुलाई तक काउंटर एफिडेविट फाइल करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि हमारे विचार से और न्याय के हित में उचित होगा कि चुनाव आयोग को तीन दस्तावेज- आधार कार्ड, चुनाव आयोग द्वारा जारी वोटर आईडी ( EPIC Card) और राशन कार्ड को अनिवार्य दस्तावेज के लिस्ट में शामिल करना चाहिए और अगर ऐसा होता है तो अधिकांश याचिकाकर्ता की मांग पूरी हो जाएगी।
